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कृष्ण प्रेम

कृष्ण प्रेमकृष्णा हमें प्यार करते हैँ । कृष्णा हमें अपने धाम में वापस लाना चाहते हैं । वह यह देख कर दुःखी है कि हम यहां दुख भोग रहे हैं । हमें भौतिक प्रकृति के तीनों गुणों से उपर उठना होगा । कृष्ण के प्रति श्रद्धा प्रेम उत्पन्न करना होगा।हमें श्रीमद भागवतम तथा भगवद गीता का अध्यन करना होगा । प्रसाद पाना होगा । हरे कृष्ण महा मंत्र का जाप करना होगा। कृष्ण से सम्भंदित पुस्तकों का अध्ययन करना होगा । माया को यदि हम खाली मिले तो वह हमें पकड़ लेंगी ।
हर समय कृष्ण को स्मरण करना होगा और संकीर्तन में भाग लेना होगा । अंतिम समय में भगवान को स्मरण करने का यही एक मार्ग है । भगवान कृष्ण शाकाहारी भोजन ग्रहण करते हैं । हमें ताज़ा पका हुआ भोजन सर्वप्रथम कृष्ण को अर्पित करना होगा । उसके पश्चात बचे हुए भोजन को प्रसाद के रूप में ग्रहण करना चाहिए ।
सदैव यह स्मरण रहे कि मैं एक आत्मा हूँ । मैं न तो कभी जन्म लेता हूँ और न कभी मरता हूँ । मैं केवल शरीर बदलता रहता हूँ । कार्य का परिणाम भोगने के लिए जन्म लेने को विवश हूँ । जन्म का मुख्य कारण इच्छा है। जन्म दुख है । जीवन दुख है । मरण भी दुख है । इच्छा पापों की माता है …

बिना शर्त प्रेम

बिना शर्त प्रेमवृंदावन के लड़कों, लड़कियों, पुरुषों और महिलाओं के बारे में सोच, प्रेम, भक्ति और समर्पण की विधि, भगवान श्री कृष्ण से प्यार करने का सबसे अच्छा और उत्तम तरीका है। वे कृष्ण को समझने की परवाह नहीं करते। वे कृष्ण को बिना शर्त प्यार करना चाहते हैं। वे कृष्ण से प्यार करते हैं, भगवान के रूप में नहीं बल्कि आपस में की सखा की रूप मे ।  कृष्ण वहां एक सामान्य चरवाहे के लड़के के रूप में खेलते हैं लेकिन कभी-कभी वह उन्हें दिखाता है कि वह भगवान है। वे जानना नहीं चाहते कि कृष्ण कितने महान हैं।

हमें बस कृष्ण से प्रेम करना चाहिए। हमारी पूर्णता सीधे कृष्ण के प्रति हमारे प्रेम के समानुपाती है। हमें कृष्ण को जानने में अपना समय बर्बाद नहीं करना चाहिए क्योंकि कृष्ण असीमित हैं। भगवद-गीता में उनके बारे में कृष्ण द्वारा दिया गया ज्ञान हमारे लिए पर्याप्त है। हमें भौतिक जगत का अधूरा ज्ञान है फिर हम कृष्ण के पूर्ण विवरण को जानने की अपेक्षा कैसे कर सकते हैं।  जीवन की पूर्णता कृष्ण के प्रति बिना शर्त प्यार पर निर्भर करती है। हम अपनी अपूर्ण इन्द्रियों और मन से कृष्ण को नहीं जान सकते।


कृष्ण हमारे वस्तु आपु…

प्रभु को कैसे पाए?

प्रभु को कैसे पाए? 
ब्रह्म गैर विनाशकारी है और परिवर्तन के बिना अनंत काल तक विद्यमान है। कर्म जीवित प्राणियों के भौतिक शरीरो का निर्माण करता है। भौतिक प्रकृति लगातार परिवर्तनों से गुजर रही है। सर्वोच्च भगवान श्री कृष्ण जीवित प्राणियों के दिल में रहते हैं और सभी प्रकार के यज्ञ  के स्वामी हैं और कृष्ण के सार्वभौमिक रूप में सभी देवगण शामिल हैं।

इसमें कोई संदेह नहीं है कि जो कोई भी अंतिम क्षण में भगवान को याद करते हुए अपने शरीर को छोड़ देगा, वह निश्चित रूप से भगवान को प्राप्त करेगा।  जो लोग भगवान को प्राप्त करते हैं वे इस दुखी और खतरनाक भौतिक दुनिया में कभी नहीं लौटते क्योंकि उन्होंने उच्च मुकाम हासिल किए हैं।


यदि व्यक्ति भगवान के अलावा किसी और को याद करता है तो उसे निश्चित रूप से उस व्यक्ति के समान शरीर मिलेगा, जिसे वह अपने शरीर को छोड़ते समय याद कर रहा था।  यदि आपने अपने शरीर को छोड़ते समय अपने कुत्ते को याद करा तो आप अगले जन्म में कुत्ते होंगे और यदि आप अपने शरीर को छोड़ते समय अपनी पत्नी को याद करते हैं तो आप अपने अगले शरीर में महिला होंगे।


अगर पत्नी अपने पति को आखिरी सांस छोड़ते समय याद क…

शुद्ध संरक्षण में कौन है?

शुद्ध संरक्षण में कौन है?भगवत गीता मे भगवान कृष्ण अर्जुन से कह रहे हैं कि शुद्ध पारलौकिक चेतना में होने के लिए, किसी व्यक्ति को इंद्रिय संतुष्टि के सभी प्रकारों को छोड़ना आवश्यक है, मन स्थिर नहीं है और यहां-वहां भटकता रहता है और जो किसी व्यक्ति का दोस्त और दुश्मन दोनों है। इंद्रियां भौतिक सुख की कामना करती हैं और मन इंद्रियों को निर्देश देता है की वह भौतिक सुख का आनंद लें और हमेशा के लिए जीव कर्म के चक्कर में फस जाएं और बार-बार जन्म लेने के लिए विवश हो । हमारी बुद्धि का सात्विक और शुद्ध होना जरूरी है ताकि वह मन को काबू में रखें । भौतिक पदार्थ से ऊपर इंद्रियां है और इंद्रियों से ऊपर मन है और मन से ऊपर बुद्धि है और बुद्धि से ऊपर आत्मा है तो हमें सिर्फ अपनी आत्मा की चिंता करनी चाहिए ।


मन हमारा मित्र है यदि हम इसे नियंत्रित करने में सक्षम हैं और मन हमारा शत्रु है यदि हम स्वयं को इसके द्वारा नियंत्रित करने की अनुमति देते हैं। भौतिक तुष्टि के लिए ये आग्रह हमारे अंदर मानसिक प्रदूषण की प्रवृत्ति के कारण उत्पन्न होते हैं जो हमें कुछ ऐसा विश्वास दिलाते हैं जो सच नहीं है। मानसिक प्रदूषण तब होता ह…

कौन पूर्ण ज्ञान में स्थित है?

कौन पूर्ण ज्ञान में स्थित है? यह भौतिक दुनिया रहने के लिए एक खतरनाक जगह है। हर दिन अखबार में, हम विभिन्न बुरी खबरें जैसे दुर्घटना, हत्या, आत्महत्या, महामारी, मौत, पड़ोसी देश द्वारा आक्रमण, प्रदूषण से उत्पन्न बीमारियां के बारे में पढ़ते हैं, ओजोन परत की कमी, प्राकृतिक आपदाओं से संबंधित आदि बुरी खबरें पढ़ते हैं।  आप और आपके परिवार की सुरक्षा कभी भी सुनिश्चित नहीं की जा सकती है।


किसी भी क्षण, हमारे जीवन में कुछ बुरा या विनाशकारी हो सकता है।  दूसरी ओर, हमारे जीवन में कई अच्छी घटनाएं भी होती हैं जैसे शादी, हमारे परिवार में किसी बच्चे का जन्म, हमारे बच्चों का परीक्षा में उत्तीर्ण होना, हमारे देश के खिलाड़ियों का एशियाई खेलों या ओलंपिक में पदक जीतना, हमारी राष्ट्रीय टीम द्वारा हासिल की गई कुछ उपलब्धि।  एक टूर्नामेंट जीतने के बाद चैंपियनशिप मिलना, हमारे देश के वैज्ञानिकों द्वारा कुछ आश्चर्यजनक प्रगति या आश्चर्यजनक उपलब्धि हासिल करना, हमारे देश के नागरिक द्वारा विज्ञान, साहित्य, कला, संगीत आदि में कुछ अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार जीतना इत्यादि।

कृष्ण चेतना में एक व्यक्ति न तो किसी बुरे और न ही अच्छे स…